ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन आश्रम शनिवार को योग, साधना और मंत्रों से गूंज उठा। अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव-2026 के छठे दिन साधकों ने ध्यान साधना और योग अभ्यास के माध्यम से मानसिक शांति का अनुभव किया। महोत्सव में 80 देशों के करीब 1500 से अधिक साधकों ने सामूहिक ध्यान और मंत्रोच्चार में भाग लिया। सुबह के सत्र में योगाचार्य दासा दास ने साधकों को ध्यान साधना का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि ध्यान मन की एकाग्रता, आंतरिक शांति और आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम है। नियमित ध्यान से तनाव कम होता है, सोचने की क्षमता बढ़ती है और भावनात्मक संतुलन बना रहता है। ध्यान के दौरान स्थिर आसन, गहरी श्वास और मन को वर्तमान में केंद्रित करने का अभ्यास कराया गया। इसके बाद आयोजित विभिन्न सत्रों में देश-विदेश के 35 से अधिक योगाचार्यों ने योग की अलग-अलग विधाओं का अभ्यास कराया। योगाचार्य दुर्गेश अमोली ने हठ योग, डॉ. ईडन गोल्डमैन ने चिकित्सा विन्यास थेरेप्यूटिक फ्लो मास्टर क्लास, योगाचार्य हर हरि सिंह ने कुंडलिनी योग, जाह्नवी क्लेयर मिसिंघम ने विन्यास प्रैक्टिस और शिवा रे ने प्राण विन्यास का अभ्यास कराया। इसके अलावा सेंसेई संदीप देसाई ने चीगोंग, योगाचार्य सुधांशु शर्मा ने सूर्योदय मंत्रोच्चार, केटी बी हैप्पी ने फोर्थ चक्र बैलेंसिंग विन्यास, योगाचार्य मयंक भट्ट ने दंड साधना, साध्वी आभा सरस्वती ने योग निद्रा और किआ मिलर ने कुंडलिनी एनर्जी एक्टिवेशन का अभ्यास कराया। मौके पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती, अनंद्रा जॉर्ज, साइमन ग्लोडे, योगाचार्य गायत्री, योगाचार्य मोहन भंडारी, अमेरिका के योगाचार्य टॉमी रोसेन सहित कई योगाचार्य और साधक मौजूद रहे। महोत्सव के माध्यम से प्रतिभागियों को योग, ध्यान और आध्यात्मिक साधना के विभिन्न आयामों से परिचित कराया जा रहा है।


