ऋषिकेश। नगर क्षेत्र की आबोहवा को साफ करने के लिए नगर निगम ने सालभर में चार करोड़ 84 लाख रुपये खर्च किए हैं। इनमें 80 प्रतिशत कार्यों को पूरा कर लिया गया है। वहीं, 20 फीसदी काम मार्च तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। दावा है कि इन कार्यों के सम्पन्न होने से शहर की हवा का एयर क्वालिटी इंडेक्स 136 के निम्न स्तर से संतोषजक 84 पर पहुंच गया है। इसे 60 तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नए वित्तीय वर्ष में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत नगर निगम को पांच करोड़ 21 लाख रुपये मिलना तय है। शनिवार को निगम कार्यालय में मेयर शंभू पासवान की अध्यक्षता में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में नगर आयुक्त गोपाल राम बिनवाल ने साफ हवा के लिए शहर के विभिन्न स्थानों पर हुए कार्यों की जानकारी साझा की। बताया कि वायु की गुणवत्ता में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने ऋषिकेश को भी राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में शामिल किया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में सरकार ने पांच मंदों में वायु प्रदूषण रोकथाम को चार करोड़ 84 लाख रुपये जारी किए थे। इनमें सर्वाधिक तीन करोड़ तीन लाख सड़कों के कच्चे किनारों को इंटरलॉकिंग टाइल्स के माध्यम से पक्का करने पर खर्च हुए हैं। सर्वे में कच्चे किनारों की वजह से नगर क्षेत्र की हवा में सर्वाधिक प्रदूषण होना पाया गया था। नगर आयुक्त ने बताया कि ट्रैफिक जाम, कूड़ा जलाने और औद्योगिक इकाइयों भी प्रदूषण का कारण बनीं। इसी तरह से ग्रीन बेल्ट विकसित करने, जागरूकता, यातयात प्रबंधन और जागरूकता पर भी एक करोड़ से ज्यादा बजट व्यय हुआ है। बताया कि नए वित्तीय वर्ष में भी ऋषिकेश के लिए कार्यक्रम में बजट का प्रावधान है। निर्धारित मदों में आवश्यक कार्यों के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। कहा कि नागरिकों के सहयोग के बिना शहर की हवा को साफ रखना संभव नहीं है। उन्होंने बैठक में स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील भी की। वहीं, सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट ने बताया कि अगले वित्तीय वर्ष में पांच करोड़ 21 लाख का आवंटन कार्यक्रम के तहत ऋषिकेश लिए होगा। इस मौके पर एआरटीओ प्रशासन रावत सिंह, संदीप रतूड़ी, प्रकाश अंथवाल, चरन सिंह, करीना मलिक, डोली भट्ट और गुरमीत सिंह आदि मौजूद रहे। कैसे बढ़ रहा वायु प्रदूषण नगर निगम प्रशासन के अनुसार सर्वे में पता चला है कि शहर में सर्वाधिक 40 प्रतिशत प्रदूषण सड़क किनारों से उड़ने वाली धूल से हो रहा है। ट्रैफिक जाम से 17, कूड़ा जलाने से 14 और औद्योगिक इकाई से नौ प्रतिशत हवा प्रदूषित हो रही है। इनकी रोकथाम के तहत नगर क्षेत्र के 15 स्थानों पर सड़कों के कच्चे किनारों को इंटरलॉकिंग टाइल्स से पक्का गया है। इसमें मुख्यतौर पर बैराज रोड, यात्रा बस अड्डा रोड, हरिद्वार बाईपास मार्ग, दून-ऋषिकेश मार्ग आदि सड़कें शामिल हैं। जागरूकता में सबसे बेहतर ऋषिकेश दस लाख से कम आबादी वाले शहरों में न सिर्फ ऋषिकेश ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण रैंकिंग में सुधार किया है, बल्कि जनजागरूकता कार्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन कर उत्तर भारत में ऊंचा मुकाम हासिल किया है। सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट ने बताया कि 34 लाख रुपये जागरूकता कार्यों पर नगर निगम ने खर्च किए हैं। इनमें स्कूलों में पहुंचकर प्रोजेक्टकर से खराब हवा से सेहत को होने वाले नुकसान आदि के बारे में जागरूक किया गया है। जागरूकता अभियान से कार्यक्रम की सफलता में मदद मिल रही है। पांच करोड़ खर्च को बन रही कार्ययोजना केंद्र से अगले वित्तीय वर्ष के लिए ऋषिकेश क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में पांच करोड़ 21 लाख रुपये का प्रावधान किया जा रहा है। यह धनराशि जल्द ही निगम को पांच मदों में खर्च करने के लिए आवंटित होगी। इससे सड़कों के किनारों को पक्का करने, सार्वजनिक स्थलों पर ग्रीन बेल्ट और पौधरोपण, ट्रैफिक सुधार कार्य, शवदाह गृहों से प्रदूषण कम करने और जनजागरूकता के कार्य किए जाएंगे। निगम ने शहर को पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त करने के लिए अब मिलने वाले बजट के लिए भी कार्ययोजना बनानी शुरू कर दी गई है।


