पिथौरागढ़। वन विभाग ने राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के सहयोग से धारचूला के दूरस्थ गांवों के काश्तकारों को सीबक थोर्न का प्रशिक्षण दिया। गुरुवार को डीएफओ आशुतोष सिंह ने बताया कि बीते दिनों सिर्खा, सिर्दाग, बूदी व गोठी में काश्तकारों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान काश्तकारों को सीबक थोर्न की कटिंग तैयार करने, नर्सरी बनाने, पौधरोपण के साथ बेरी की प्रोसेसिंग कर पल्प, जूस, पाउडर, तेल, सूखी पत्तियों को तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। डीएफओ ने कहा सीबक थोर्न के उत्पादन को और अधिक बढ़ाने व इसके उत्पादों को एक ब्रांड के रूप में पहचान देने के प्रयास किये जा रहे है। ताकि सीबक थोर्न उत्पादन में क्षेत्र को देश में नई पहचान मिल सकें। प्रशिक्षक भुवन चन्द्र मुरारी, मनोज बिष्ट ने बताया कि वन पंचायतों के स्थानीय काश्तकारों को रोजगार प्रदान करने व क्षेत्र को हर्बल पर्यटन के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से सीबक थोर्न यानि वन चूख के वृक्षारोपण व प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जा रहा है। कहा कि व्यास, चौदास व दारमा घाटियों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एक बहुउपयोगी औषधीय वृक्ष है। इस फल में विटामिन ए, ई, सी, ओमेंगा-3, ओमेंगा-7 व ओमेंगा -9 प्रचुर मात्रा में होने से निर्मित उत्पाद से किडनी, हृदय रोग, पाचन तन्त्र कोलेस्ट्रॉल, चमकदार त्वचा व घावों को भरने में रामबाण होता है। यहां वन दरोगा धारचूला जय प्रकाश रौतेला, आनन्द सिंह धामी, वन आरक्षी अरविन्द प्रसाद, संजय गुंज्याल, सूरज कुमार मौजूद रहे।


