बागेश्वर। गरुड़ ब्लॉक मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दरणा गाँव आज भी विकास की बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर है। कोट्टुलारी ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले इस गाँव में लगभग 50 परिवार निवास करते हैं, लेकिन स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी यहाँ तक सड़क नहीं पहुँच पाई है। परिणामस्वरूप ग्रामीणों को आज भी अपने दैनिक जीवन से लेकर आपातकालीन परिस्थितियों तक में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इस उपेक्षा की मार का ताजा उदाहरण 78 वर्षीय श्रीमती देवकी देवी के रूप में सामने आया, जो बीते 28 मार्च से अस्वस्थ थीं। दुर्भाग्यवश गाँव में पर्याप्त लोगों की अनुपस्थिति के कारण उन्हें समय पर अस्पताल नहीं ले जाया जा सका। अंततः 29 मार्च की सुबह ग्रामीणों ने मानवता और साहस का परिचय देते हुए उन्हें डोली में बैठाकर लगभग 5 किलोमीटर लंबे दुर्गम पहाड़ी मार्ग से नीचे तक पहुंचाया। सुबह करीब 7 बजे उन्हें प्राथमिक उपचार दिलाया गया, जिसके बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए हल्द्वानी रेफर कर दिया गया।
दरणा गाँव से अस्पताल तक का मार्ग अत्यंत जोखिमपूर्ण है। संकरे और ऊबड़-खाबड़ रास्तों के साथ-साथ जंगलों में फैले चीड़ के पेड़ों से गिरने वाला पिरूल इस मार्ग को और अधिक फिसलन भरा बना देता है। ऐसे में मरीज को डोली में ले जाना न केवल कठिन बल्कि जानलेवा जोखिम से भरा होता है। जरा सी चूक किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से जनप्रतिनिधि चुनाव के समय सड़क निर्माण के वादे करते रहे हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही ये आश्वासन भी खत्म हो जाते हैं। पूर्व ग्राम प्रधान राजेंद्र किरमोलिया ने इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि ग्रामवासियों को लगातार केवल झूठे वादों के सहारे रखा गया है और उनके साथ अन्याय हो रहा है।
दरणा गाँव की यह स्थिति शासन-प्रशासन के उन दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है, जिनमें हर गाँव तक सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की बात कही जाती है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस पीड़ा को समझते हुए कोई ठोस पहल करते हैं, या फिर दरणा गाँव के लोग यूं ही डोली के सहारे अपनी जिंदगी ढोने को विवश रहेंगे।


