अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में विश्व बौद्धिक संपदा दिवस के अवसर पर बुधवार को एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें कृषि शोधों के संरक्षण और बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता पर बल दिया गया। कार्यक्रम संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत की अध्यक्षता में हाइब्रिड माध्यम से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में आईटीएमयू के अध्यक्ष डॉ. एन.के. हेडाऊ ने बौद्धिक संपदा की वैश्विक महत्ता और संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता डॉ. एस.के. वर्मा ने कृषि में बौद्धिक संपदा विषय पर व्याख्यान देते हुए ‘पौधा किस्म संरक्षण एवं कृषक अधिकार’ नियमों की जानकारी दी और संबंधित कानूनी प्रावधानों को विस्तार से समझाया। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आर.के. खुल्बे ने भौगोलिक उपदर्शन के महत्व पर चर्चा करते हुए स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और संरक्षण की आवश्यकता बताई। वहीं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनुराधा भारतीय ने कृषक किस्म के पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल तरीके से प्रस्तुत किया। डॉ. लक्ष्मी कांत ने कहा कि वर्तमान समय में कृषि अनुसंधान को बौद्धिक संपदा अधिकारों के माध्यम से सुरक्षित करना आवश्यक है। उन्होंने वैज्ञानिकों से नवाचारों के साथ उनके विधिक संरक्षण पर भी ध्यान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में संस्थान और हवालबाग प्रक्षेत्र के 38 वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के साथ कृषि विज्ञान केंद्र उत्तरकाशी के 6 और बागेश्वर के 8 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से भागीदारी की। परिचर्चा सत्र में प्रतिभागियों ने बौद्धिक संपदा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. के.के. मिश्रा ने किया, जबकि अंत में डॉ. गौरव वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।


