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एसएसजे मेडिकल कॉलेज में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध पर राष्ट्रीय सीएमई आयोजित


अल्मोड़ा। सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान के सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग ने चिकित्सा शिक्षा इकाई के सहयोग से एंटीमाइक्रोबियल स्टूअर्डशिप विषय पर राष्ट्रीय सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन किया। ‘डिटेक्ट–डिसाइफर–डिफीट: सुरक्षित भविष्य के लिए रणनीतियों का निर्माण’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में देशभर के विशेषज्ञों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (एएमआर) की बढ़ती चुनौती और एंटीबायोटिक दवाओं के तर्कसंगत उपयोग पर विशेष चर्चा हुई। मुख्य वक्ता एम्स मंगलगिरि के सूक्ष्मजीव विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सुमित राय ने सीमित संसाधनों वाले स्वास्थ्य संस्थानों में भी प्रभावी एंटीमाइक्रोबियल स्टूअर्डशिप कार्यक्रम लागू करने की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। एम्स मंगलगिरि के डॉ. देबब्रत दास ने भी वैज्ञानिक चर्चाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वैज्ञानिक सत्रों में एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज देहरादून की डॉ. सुनंदिनी कपूर ने एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध से मुकाबले में प्रयोगशाला कर्मियों की भूमिका पर व्याख्यान दिया। हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, नई दिल्ली के डॉ. अयान कुमार दास ने अस्पताल आधारित एंटीबायोग्राम के महत्व पर प्रकाश डाला। अपोलो अस्पताल चेन्नई के डॉ. सुरेश कुमार डी ने बहु-औषधि प्रतिरोधी जीवाणुओं के उपचार विकल्पों पर चर्चा की, जबकि एसएसजेआईएमएसआर के डॉ. डी.सी. पुनेरा ने एईसीओपीडी में एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण उपयोग पर अपने विचार रखे। अंतिम सत्र में सूक्ष्मजीव विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. एम. अनुराधा ने रोग निदान आधारित एंटीमाइक्रोबियल उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद आयोजित विशेषज्ञ पैनल चर्चा में संक्रमण नियंत्रण, एंटीबायोग्राम निर्माण, डायग्नोस्टिक स्टूअर्डशिप और प्रतिरोधी रोगजनकों की निगरानी जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में डॉ. उर्मिला पलारिया, डॉ. हेमंत कुमार दत्त, विक्रांत नेगी, डॉ. रवि सैनी, डॉ. प्रियंका शर्मा, डॉ. श्रद्धा शर्मा, डॉ. आदित्य चौहान, डॉ. प्रीत इंदर सिंह, डॉ. लक्ष्य और डॉ. पंकज सहित संस्थान के अनेक संकाय सदस्य एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन आयोजन सचिव डॉ. रजत प्रकाश के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। आयोजकों ने एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध से निपटने के लिए जागरूकता, शोध और तर्कसंगत एंटीबायोटिक उपयोग को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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