अल्मोड़ा। कुमाऊं की आराध्य देवी नंदा-सुनंदा को समर्पित ऐतिहासिक नंदा देवी मेले का इस वर्ष 16 सितंबर से शुभारंभ होगा। मेले की सबसे खास धार्मिक परंपरा कदली वृक्षों से नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं का निर्माण है। 17 सितंबर को कदली वृक्षों को निमंत्रण दिया जाएगा और 18 सितंबर को उन्हें नंदा देवी मंदिर लाया जाएगा। इसके बाद विधि-विधान से एक कदली वृक्ष से नंदा और दूसरे से सुनंदा की प्रतिमा का निर्माण किया जाएगा। 23 सितंबर को नंदा-सुनंदा का डोला उठेगा और नगर भ्रमण के बाद मूर्तियों का विसर्जन दुगालखोला स्थित नौले में किया जाएगा। नंदा देवी मंदिर समिति के अध्यक्ष मनोज वर्मा ने बताया वर्ष 1816 तक मेले का आयोजन मल्ला महल में होता आया था। उस समय कुमाऊं के कमिश्नर मिस्टर ट्रेल ने मल्ला महल से मूर्तियों को नंदा देवी मंदिर में स्थापित करवाया। इसके बाद से नंदा देवी मंदिर में मेले के आयोजन की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी जारी है। नंदा देवी मेले की धार्मिक परंपराओं में कदली वृक्षों का विशेष महत्व है। प्रतिमाओं के निर्माण के लिए पहले कदली वृक्षों का चयन किया जाता है और विधि-विधान से उन्हें निमंत्रण दिया जाता है। निमंत्रण के बाद कदली वृक्षों को मंदिर लाया जाता है और उनसे नंदा-सुनंदा की प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं। एक कदली वृक्ष से नंदा और दूसरे से सुनंदा की प्रतिमा का निर्माण किया जाता है। इस वर्ष आठ दिवसीय मेले का आधिकारिक शुभारंभ 16 सितंबर से होगा और 23 सितंबर तक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। मेले की गतिविधियां नंदा देवी मंदिर परिसर के साथ एडम्स मैदान में भी आयोजित की जाएंगी। सांस्कृतिक आयोजनों और प्रतियोगिताओं के जरिए स्थानीय लोक संस्कृति, कला और प्रतिभाओं को मंच मिलेगा। 23 सितंबर को मेले के अंतिम प्रमुख धार्मिक आयोजन के रूप में नंदा-सुनंदा का डोला उठेगा। डोले के साथ नगर भ्रमण की परंपरा भी मेले का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके बाद नंदा-सुनंदा की मूर्तियों का विसर्जन दुगालखोला स्थित नौले में किया जाएगा। मनोज वर्मा ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मेले में चंद वंशज मौजूद रहेंगे। इनमें युवराज नरेंद्र चंद राज सिंह, युवरानी कामाक्षी सिंह, राजकुमार सोमेश्वर चंद राज सिंह, कुंवर सिद्धेश्वर चंद सिंह और उनके परिजन शामिल होंगे। चंद वंशजों की मौजूदगी मेले की धार्मिक परंपरा के साथ उसके राजवंशीय इतिहास की कड़ी को भी जोड़ती है।


