अल्मोड़ा। विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की ओर से अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत किसानों को बैकयार्ड मुर्गीपालन के लिए रेनबो रोस्टर प्रजाति के चूजों का वितरण किया गया। कार्यक्रम संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त के निर्देशन और कृषि विज्ञान केन्द्र काफलीगैर के नोडल अधिकारी डॉ. निर्मल कुमार हेडाऊ के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के तहत ग्राम उडेरखानी और लोब के 66 चयनित किसानों को आजीविका सुधार और पोषण में प्रोटीन की कमी दूर करने के उद्देश्य से 1600 रेनबो रोस्टर प्रजाति के चूजे वितरित किए गए। इसके साथ ही किसानों को मुर्गी आहार, पानी के बर्तन और दवाइयां भी उपलब्ध कराई गईं। अनुकरणीय परीक्षण के अंतर्गत ग्राम औखलीसिरोद, बिलौरी, करासीबुंगा, झिरौली, गाड़ीखेत, तुपेड़ और बनलेख के 33 किसानों को भी रेनबो रोस्टर चूजे, ब्रूडर दाना, बर्तन और दवाइयां दी गईं। अधिकारियों ने बताया कि रेनबो रोस्टर कम लागत, कम तकनीकी देखभाल और अंडा व मांस दोनों उद्देश्यों के लिए उपयुक्त प्रजाति है, जो बैकयार्ड मुर्गीपालन के लिए लाभकारी मानी जाती है। यह कार्यक्रम आत्मा परियोजना बागेश्वर के वित्तीय सहयोग से संचालित किया गया। चूजों की उपलब्धता राजकीय कुक्कुट प्रक्षेत्र हवालबाग से सुनिश्चित की गई। कार्यक्रम के दौरान डॉ. एन.के. सिंह ने किसानों को बैकयार्ड मुर्गीपालन के प्रबंधन संबंधी प्रशिक्षण दिया। कृषि विज्ञान केन्द्र काफलीगैर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. राज कुमार ने दैनिक भोजन में अंडे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों को इसे नियमित आहार में शामिल करने की सलाह दी। कार्यक्रम के संचालन में अनुसूचित जाति उपयोजना के नोडल अधिकारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गौरव वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस दौरान हरीश चन्द्र जोशी, डॉ. अमित कुमार, डॉ. राजेश कुमार मीणा, मनोज कुमार, महेश सिंह, सौरभ सिंह, बहादुर सिंह, सुरेश लाल और सुन्दर लाल सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।


