Sunday, January 18, 2026

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स्थापना दिवस पर राज्य की प्रगति और संभावनाओं पर मंथन


नई टिहरी। राजकीय महाविद्यालय देवप्रयाग में प्राचार्य डॉ नर्वदेश्वर शुक्ल की अध्यक्षता में राज्य स्थापना का रजत जयंती समारोह धूम-धाम से मनाया गया। मुख्य अतिथि नगरपालिका सभासद राहुल कोटियाल रहे। कार्यक्रम मां शारदे के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। छात्र-छात्राओं ने मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। प्राध्यापक डॉ ओम प्रकाश ने राज्य स्थापना के लिए हुए प्रयासों की चर्चा कर कहा कि राज्य के गठन से लेकर 25 वर्ष तक की यात्रा के दौरान राज्य की स्थिति, औद्योगिक विकास ,रोजगार, परिवहन व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण आदि क्षेत्रों में सार्थक प्रयास किए हैं। डॉ.अमित कुमार ने राज्य की उपलब्धियों एवं भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार रखे। प्राध्यापिका डॉ. सृजना राणा ने राज्य स्थापना में जीवन का बलिदान देने वाले शहीदों को श्रृद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा अभी नीति नियामकों को स्वास्थ्य, पलायन एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर ध्यान देते हुए निमार्ण करने की आवश्यकता है। डॉ मनोज कुमार ने उत्तराखंड शब्द की उत्पत्ति एवं राज्य गठन की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर विश्वविद्यालय प्रतिनिधि आर्यनदीप एवं छात्र संघ अध्यक्ष सुमित ने भी उत्तराखण्ड राज्य निर्माण की पृष्ठभूमि पर अपनी बात रखी। एकल गायन प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान क्रमशः तुषार, तानिया एवं सुखदेव ने प्राप्त किया। सामूहिक गायन में कंचन, कोमल एवं कृतिका को पुरस्कृत किया गया। एकल नृत्य में पूजा एवं विशिष्ट प्रस्तुति में ईशा ने पुरस्कार प्राप्त किया। पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम , द्वितीय एवं तृतीय स्थान क्रमशः सोनिया, अमीषा चौहान एवं मुस्कान ने प्राप्त किया। निबंध प्रतियोगिता में स्नेहा, दीया एवं अमीषा ने क्रमशः प्रथम द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया। सामूहिक नृत्य में सपना, संतोषी, आंचल, मुस्कान, अंजली एवं मानसी को पुरस्कृत किया गया। पूजा, प्रिया, रागनी, सपना, राखी, मनीषा, काजल, खुशी को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके पश्चात मुख्य अतिथि राहुल कोटियाल ने युवा उत्तराखंड के निर्माण में अनेक विभूतियों के योगदान को स्मरण करते हुए श्रृद्धांजलि अर्पित कर कहा कि पहाड़ी राज्य की जिस परिकल्पना को लेकर राज्य निर्माण के लिए संघर्ष किया गया था, उसे साकार करने को विस्तृत कार्ययोजनायें बनाए जाने की आवश्यकता है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ नर्वदेश्वर शुक्ला ने कहा कि क्षेत्रीय विकास में असंतुलन ने अलग राज्य स्थापना के आंदोलन की नींव रखी। डॉ रंजू उनियाल ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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