देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षा और आजीविका के लिए आए बाहरी राज्यों के अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों और लोगों के साथ हो रहे भेदभाव व अवैध उत्पीड़न के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद (जिला देहरादून) ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। जमीयत उलमा-ए-हिंद के जिलाध्यक्ष मौलाना अब्दुल मन्नान कासमी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि बिहार और अन्य राज्यों से आए मुस्लिम छात्रों व उनके परिजनों के साथ कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा संगठित रूप से अभद्र व्यवहार और दस्तावेजों की अनधिकृत जांच की जा रही है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि यह कृत्य न केवल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 28 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि आईपीसी के तहत भी दंडनीय अपराध है। प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मांग की कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराई जाए और बाहरी राज्यों से आए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक पुलिस बल व निगरानी तंत्र को सुदृढ़ किया जाए। इस दौरान प्रदेश प्रवक्ता हाफिज शाहनजर, कोषाध्यक्ष मास्टर अब्दुल सत्तार, शहर सदर मुफ्ती अयाज अहमद और मोहम्मद हसन आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।


