अल्मोड़ा। विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा संचालित राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत हवालबाग विकासखंड के बिमोला और भिकियासैण विकासखंड के चौरा गांव में कृषक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों में किसानों को मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग, कृषि भूमि संरक्षण तथा टिकाऊ खेती की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों के दक्ष उपयोग तथा कृषि विकास योजनाओं के प्रति जागरूक करना था। बिमोला गांव में 17 किसानों, जिनमें आठ महिलाएं शामिल थीं, जबकि चौरा गांव में 54 किसानों, जिनमें 22 महिलाएं शामिल थीं, ने भागीदारी की। वैज्ञानिकों ने किसानों को मृदा परीक्षण के महत्व, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी दी। इसके साथ ही जल एवं मृदा संरक्षण, जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों, दलहनी एवं तिलहनी फसलों को फसल चक्र में शामिल करने तथा टिकाऊ कृषि उत्पादन की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रमों में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मीकम्पोस्ट और जैव उर्वरकों के उपयोग के लाभ बताए गए। बिमोला गांव में दलहन, तिलहन, सब्जियों, हल्दी और अदरक जैसी फसलों के माध्यम से फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित किया गया। साथ ही कुरमुला प्रबंधन, उसके लक्षणों, फसल पर प्रभाव और नियंत्रण उपायों की जानकारी भी दी गई। चौरा गांव में किसानों ने जंगली एवं आवारा पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान की समस्या प्रमुखता से उठाई, जिस पर वैज्ञानिकों ने तकनीकी सुझाव दिए। किसानों को नियमित मृदा परीक्षण कराने तथा सॉयल हेल्थ कार्ड की सिफारिशों के अनुरूप पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की सलाह भी दी गई। इसके अलावा कृषि ऋण, अनुदान और कृषि मशीनीकरण से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी साझा की गई। कार्यक्रमों के दौरान किसानों ने कृषि संबंधी समस्याओं और जिज्ञासाओं को वैज्ञानिकों के समक्ष रखा, जिनका समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. आर.के. खुल्बे, डॉ. जे.पी. आदित्य, पुष्कर फर्त्याल, आशीष रेखाड़ी और डॉ. बी.एम. पांडेय सहित अन्य वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने किसानों से संवाद किया।


