अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की ओर से केंद्र सरकार के खेत बचाओ अभियान के तहत हवालबाग और स्याल्दे विकासखंड के गांवों में कृषक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को टिकाऊ खेती, मृदा स्वास्थ्य और कीट प्रबंधन की जानकारी दी गई। संस्थान के वैज्ञानिकों ने किसानों को जलवायु सहनशील खेती, खेत संरक्षण, रोग एवं कीट प्रबंधन तथा जैविक और प्राकृतिक खेती की तकनीकों से अवगत कराया। हवालबाग विकासखंड के चाण, रौन, डाल और जुड़कफून गांवों में आयोजित कार्यक्रमों में 63 किसानों ने भाग लिया। इस दौरान किसानों को संतुलित पोषण, एकीकृत पोषक प्रबंधन, जीवामृत और घनजीवामृत के उपयोग के साथ गोबर की खाद के वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में मंडुवा सहित अन्य फसलों को बंदरों, जंगली सूअरों और कुरमुला कीट से होने वाले नुकसान पर भी चर्चा हुई। वैज्ञानिकों ने अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद के उपयोग के साथ वीएल लाइट ट्रैप और बैसिलस सीरियस आधारित उपाय अपनाने की सलाह दी। स्याल्दे विकासखंड के पथरखोला गांव में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में 40 किसानों ने भाग लिया। यहां किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा जैविक पदार्थों के प्रयोग से भूमि की उर्वरता बनाए रखने के उपाय बताए गए। आम की फसल को पाले से होने वाले नुकसान से बचाने के संबंध में भी तकनीकी जानकारी दी गई। कार्यक्रमों में किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, उद्यान एवं रेशम विकास योजनाओं सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। साथ ही कृषि और उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसान आईडी बनवाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान किसानों और ग्राम प्रधानों ने गांवों को मॉडल प्रक्षेत्र ग्राम के रूप में विकसित करने, तकनीकी सहयोग बढ़ाने तथा वन्यजीवों से फसलों की सुरक्षा के स्थायी समाधान की मांग भी उठाई।


