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‘टीईटी-सीटीईटी अनिवार्य किए जाने के आदेश पर पुनर्विचार हो’


रुद्रपुर। राजकीय जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ, शाखा रुद्रपुर ने मंगलवार को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन कलेक्ट्रेट पहुंचकर एडीएम कौस्तुभ मिश्रा को सौंपा। ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के तहत कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों के लिए टीईटी-सीटीईटी अनिवार्य किए जाने के आदेश पर पुनर्विचार की मांग की गई। शिक्षक संघ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार 55 वर्ष तक के शिक्षकों को दो वर्ष के भीतर टीईटी-सीटीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है। ऐसा न करने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति का प्रावधान रखा गया है। इससे उत्तराखंड के 15 से 30 हजार शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं और उनमें भविष्य को लेकर चिंता व्याप्त है।
ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की नियुक्ति तत्कालीन नियमों के तहत हुई थी, जबकि टीईटी-सीटीईटी की अनिवार्यता बाद में लागू की गई। ऐसे में 40 से 55 वर्ष आयु वर्ग के शिक्षकों पर यह नियम लागू करना न्यायसंगत नहीं है। शिक्षक संघ ने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 में एनसीटीई द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार और शिक्षा विभाग ने समय पर आवश्यक आदेश जारी नहीं किए, जिससे शिक्षक समय रहते पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सके। संघ ने मांग की कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी-सीटीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखा जाए और उनकी सेवा व पदोन्नति सुरक्षित करने के लिए आवश्यक संशोधन अथवा अध्यादेश लाया जाए। इस दौरान शिक्षक संघ के अध्यक्ष मदन लाल लोधी, मंत्री रश्मि बिष्ट, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष खेमकरन सिंह, कोषाध्यक्ष फलबदन मौर्य, अवनीश गंगवार, नंदलाल चौहान, कमलेश कुमार शर्मा, शेर मोहम्मद, प्रमोद कुमार आर्य, विनय कुमार द्विवेदी और अनीता रावत मौजूद रहे।

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