हरिद्वार। सरकार का उद्देश्य विधि-विवादित किशोरों को केवल संरक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, कौशल विकास और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। यह बात महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने सोमवार को हरिद्वार स्थित राजकीय विशेष गृह परिसर में प्रदेश के पहले राजकीय ‘प्लेस ऑफ सेफ्टी (किशोर)’ भवन के शिलान्यास के अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम-2015 के तहत वर्तमान में हरिद्वार में विशेष गृह और प्लेस ऑफ सेफ्टी एक ही भवन में संचालित हैं। संस्थान की बढ़ती आवश्यकता और कार्य की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने 555.15 लाख रुपये की लागत से 50 किशोरों की क्षमता वाले पृथक राजकीय प्लेस ऑफ सेफ्टी भवन के निर्माण को मंजूरी दी है। भवन बनने के बाद हरिद्वार में प्रदेश का पहला राजकीय प्लेस ऑफ सेफ्टी संचालित होगा, जिससे विधि-विवादित किशोरों के पुनर्वास और भविष्य निर्माण को नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए रानीपुर विधायक आदेश चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार बाल संरक्षण और पुनर्वास के क्षेत्र में संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। नए भवन में किशोरों को बेहतर आवास, शिक्षा, परामर्श, कौशल विकास और पुनर्वास की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। कार्यक्रम में विभाग के निदेशक बंशी लाल राणा, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, मुख्य परिवीक्षा अधिकारी अंजना गुप्ता, उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी राजीव नयन, जिला प्रोबेशन अधिकारी अविनाश भदौरिया, विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
बाल देखरेख गृह का किया निरीक्षण, बच्चों से जानी समस्याएं:
शिलान्यास कार्यक्रम के बाद मंत्री रेखा आर्या ने राजकीय बाल देखरेख गृह, संप्रेक्षण गृह (किशोर) और राजकीय विशिष्ट दत्तक ग्रहण एजेंसी का निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई, दैनिक दिनचर्या और अन्य जरूरतों के बारे में बातचीत की और अधिकारियों को बच्चों के सर्वोत्तम हित में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन संतोष रावत ने किया।


