अल्मोड़ा। पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से गोविन्द बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान में हरित कौशल विकास कार्यक्रम के तहत प्रकृति संरक्षण सह इको टूरिज्म गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण में विभिन्न जिलों से चयनित 20 प्रशिक्षणार्थी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के निदेशक डॉ. आई.डी. भट्ट ने किया। उन्होंने स्वागत संबोधन में संस्थान की गतिविधियों, चार प्रमुख केंद्रों और पांच क्षेत्रीय इकाइयों की जानकारी देते हुए प्रतिभागियों से पर्यावरण संरक्षण को आजीविका से जोड़ने तथा मंत्रालय के दीर्घकालिक उद्देश्यों को पूरा करने में योगदान देने का आह्वान किया। इआईएसीपी केंद्र के समन्वयक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक ई.एम.एस. लोधी ने हरित कौशल विकास कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रशिक्षण के दौरान इको टूरिज्म के साथ होमस्टे, मधुमक्खी पालन, हाइड्रोपोनिक्स, फोटोग्राफी समेत विभिन्न रोजगारपरक विषयों की जानकारी भी दी जाएगी। मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा ने कहा कि सीमांत और पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन आधारित स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों की जानकारी देते हुए युवाओं से इनका लाभ उठाने का आह्वान किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में करीब 50 विशेषज्ञ अपने अनुभव प्रतिभागियों के साथ साझा करेंगे। प्रशिक्षण के दौरान पैराग्लाइडिंग, राफ्टिंग, ट्रैकिंग, उद्यमिता और इको टूरिज्म से जुड़े विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक ज्ञान भी दिया जाएगा, ताकि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रतिभागी अपने गांव और जनपद में स्वरोजगार के नए अवसर विकसित कर सकें। कार्यक्रम में डॉ. महेशानंद, कमल किशोर टम्टा, रोहन भाकुनी, हेम तिवारी सहित संस्थान के शोधार्थी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।


