अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र हवालबाग में तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान घनेली गांव के 36 किसानों ने मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीक सीखी। अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत आयोजित प्रशिक्षण में किसानों को बटन और ढींगरी मशरूम उत्पादन के साथ मशरूम का बीज तैयार करने, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की जानकारी दी गई। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त के मार्गदर्शन में आयोजित प्रशिक्षण में हवालबाग विकासखंड के ग्राम घनेली के 36 किसानों ने प्रतिभाग किया। इनमें 14 पुरुष और 22 महिलाएं शामिल रहीं। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को मशरूम उत्पादन की तकनीकों से परिचित कर इसे आय के अतिरिक्त साधन के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना रहा। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को बटन एवं ढींगरी मशरूम उत्पादन की तकनीक, मशरूम बीज तैयार करने, आवरण मृदा बनाने, मशरूम प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने की जानकारी दी गई। इसके अलावा मशरूम में लगने वाले विभिन्न रोगों और उनके प्रबंधन के बारे में भी विस्तार से बताया गया। किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रखते हुए व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। ढींगरी मशरूम उत्पादन के लिए माध्यम तैयार करने और उसमें बीज की बुआई करने की प्रक्रिया का व्यक्तिगत प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही मशरूम बीज तैयार करने की विधि भी किसानों को समझाई गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वय डॉ. के.के. मिश्रा, डॉ. पंकज कुमार मिश्रा और डॉ. गौरव वर्मा ने किया। भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत आयोजित इस प्रशिक्षण से किसानों को मशरूम उत्पादन को वैज्ञानिक तरीके से अपनाने और इससे आय बढ़ाने की तकनीकी जानकारी मिली।


