विकासनगर। जंगलों की हिफाजत करते हुए जान गंवाने वाले वनकर्मियों का बलिदान शुक्रवार को रामपुर मंडी स्थित वन आरक्षी प्रशिक्षण केंद्र में याद किया गया। वन शहीद दिवस पर वनकर्मियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके त्याग को नमन किया। कार्यक्रम में वन सुरक्षा को केवल विभागीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व से जुड़ा दायित्व बताया गया। केंद्र के आरओ आनंद सिंह रावत ने वनकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि जंगलों की रक्षा की ड्यूटी आसान नहीं है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों, वनाग्नि, अवैध कटान और वन्यजीवों से जुड़े खतरों के बीच वनकर्मी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।
कई वनकर्मियों ने कर्तव्य की राह में अपने प्राण तक न्योछावर किए हैं। उनकी शहादत को याद करने का सबसे बड़ा अर्थ यही है कि हम जंगल की सुरक्षा के अपने कर्तव्य से कभी पीछे न हटें। उन्होंने कहा कि वन शहीदों का बलिदान प्रत्येक वनकर्मी के लिए प्रेरणा है। जंगलों को बचाना सिर्फ पेड़ों को बचाना नहीं, बल्कि जलस्रोतों, वन्यजीवों, जैव विविधता और मानव जीवन की सुरक्षा करना है। वनकर्मी अपनी जिम्मेदारी को केवल नौकरी न समझें, बल्कि इसे पर्यावरण और समाज की सुरक्षा का दायित्व मानकर निभाएं। वन दरोगा प्रदीप सक्सैना ने वनकर्मियों से अवैध कटान, वनाग्नि, शिकार और वन संपदा के दोहन पर प्रभावी निगरानी रखने के साथ ग्रामीणों और आम लोगों को भी वन संरक्षण के प्रति जागरूक करने की अपील की। कहा कि वन शहीदों की कुर्बानी विभाग के लिए गौरव के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। उनके संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा लेकर वन संपदा की रक्षा करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस दौरान गौतम क्षेत्री, सपना चौहान, शिवानी, योगेंद्र गुरुंग आदि मौजूद रहे।


