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प्रदेश के संसाधनों के दोहन और बढ़ते नशे पर बरसे पीसी तिवारी, वैकल्पिक राजनीति को मजबूत करने का आह्वान


बागेश्वर। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) के केंद्रीय समन्वयक पीसी तिवारी ने गरुड़ में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान प्रदेश की राजनीतिक व्यवस्था, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को लेकर भाजपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों राष्ट्रीय दलों ने बारी-बारी से सत्ता संभालते हुए राज्य के संसाधनों का दोहन किया, लेकिन आम जनता की अपेक्षाओं और राज्य आंदोलन के मूल उद्देश्यों को पूरा करने में विफल रहे।
पीसी तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन के पीछे जो सपने और आकांक्षाएं थीं, वे आज भी अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों बाद भी पहाड़ों से पलायन नहीं रुका है और स्थानीय लोगों को अपने ही संसाधनों पर अपेक्षित अधिकार नहीं मिल सका है। उन्होंने प्रसिद्ध उक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि “पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी, पहाड़ के काम नहीं आ पाई है”, जो आज भी प्रदेश की वास्तविक स्थिति को दर्शाती है।
उपपा नेता ने आरोप लगाया कि सरकारें प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय हितों की रक्षा करने के बजाय खनन तथा शराब व्यवसाय को बढ़ावा देने में अधिक रुचि दिखा रही हैं। उन्होंने कहा कि इससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए तिवारी ने कहा कि जिस समाज का युवा वर्ग दिग्भ्रमित हो जाए, उसके उज्ज्वल भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार, शिक्षा और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें गलत दिशा में धकेला जा रहा है, जो प्रदेश के लिए गंभीर चिंता का विषय है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान समय में पूंजीपतियों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जबकि आम जनता की समस्याएं और चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि निकाय चुनावों से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों तक धनबल और शराब के बढ़ते प्रभाव ने लोकतंत्र की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
पत्रकार वार्ता के अंत में पीसी तिवारी ने प्रदेश की जनता से जागरूक होकर वैकल्पिक राजनीति को मजबूत करने तथा जनहित के मुद्दों को केंद्र में रखकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि उत्तराखंड के समग्र विकास और राज्य आंदोलन की मूल भावना को साकार करने के लिए जनता की सक्रिय भागीदारी और राजनीतिक जागरूकता आवश्यक है।

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