रुद्रपुर। हरेला पर्व पर आयोजित ‘हरित यज्ञ’ अभियान के शुभारंभ समारोह में कुलपति डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय देश के कृषि भविष्य और वैज्ञानिक सोच को गढ़ने वाली कर्मभूमि है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1963 में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने भी कहा था कि विश्वविद्यालय भवनों से नहीं, विचारों और मूल्यों से बनते हैं। कुलपति ने कहा कि देश में हरित क्रांति और खाद्यान्न आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव पंतनगर विश्वविद्यालय ने रखी। यहां की पंतनगर संस्कृति का मूल मंत्र है करना, अधिक करना और बेहतर करना। यही संस्कार यहां के विद्यार्थियों को देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाते हैं।
उन्होंने कहा कि हरेला पर्व प्रकृति के प्रति भारतीय संस्कृति की आस्था का प्रतीक है। इसी भावना के साथ विश्वविद्यालय ने 16 से 31 जुलाई तक ‘हरित यज्ञ’ अभियान शुरू किया है। इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर, कृषि विज्ञान केंद्रों, अनुसंधान केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक पौधरोपण किया जाएगा। कहा कि भारतीय संस्कृति में धरती, नदियों, पर्वतों और प्रकृति की पूजा की परंपरा रही है। हरेला उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का पर्व है।


