देहरादून। भारतीय जैन मिलन के नेतृत्व में जैन समाज के प्रतिनिधियों ने बुधवार को एडीएम स्मिता परमार जायसवाल को मेनका गांधी के बयान के विरोध में प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मेनका गांधी द्वारा जैन धर्म एवं दिगंबर संतों की पिच्छिका के संबंध में दिए गए कथित भ्रामक एवं तथ्यहीन बयान पर गहरा विरोध दर्ज कराया। जैन मिलन की केंद्रीय महिला संयोजिका मधु सचिन जैन ने बताया कि मेनका गांधी के मिथ्या आरोपों के विरोध और जैन समाज की धार्मिक भावनाओं को भड़काने को लेकर जैन समाज मेनका गांधी पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहा है। इसके लिए यह विरोध प्रदर्शन किया गया। उन्होंने बताया कि जैन धर्म अहिंसा, करुणा और जियो और जीने दो के सिद्धांत पर आधारित है। समाज का मानना है कि पिच्छिका के निर्माण के लिए मोरों की हत्या किए जाने संबंधी बयान झूठा है तथा इससे जैन समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पिच्छिका प्राकृतिक रूप से झड़ने वाले मोरपंखों से बनाई जाती है और इसका उपयोग सूक्ष्म जीवों की रक्षा के उद्देश्य से किया जाता है। भारतीय जैन मिलन ने केंद्र सरकार से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर, यदि विधि के अनुसार कोई अपराध बनता हो, तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में किसी भी धर्म के प्रतीकों एवं मान्यताओं के संबंध में तथ्यहीन एवं भ्रामक टिप्पणियों से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाने का भी आग्रह किया गया। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि जैन समाज सदैव शांति, अहिंसा, राष्ट्रहित और सामाजिक सेवा के लिए समर्पित रहा है तथा समाज अपनी धार्मिक आस्था और सम्मान की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखता रहेगा। इस अवसर पर भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नरेश चंद जैन, क्षेत्र संख्या-14 के क्षेत्रीय अध्यक्ष संजय जैन, जैन मिलन पारस के अध्यक्ष अंकुर जैन, जैन मिलन प्रगति, जैन मिलन महावीर, जैन मिलन मूक माटी की प्रतिनिधि सिम्मी जैन (धार्मिक संयोजिका), अजय जैन, प्रतीक जैन, जितेंद्र जैन, सुरेश जैन, पूनम जैन, प्रीति जैन, गौरव जैन, अनिल जैन सहित सकल जैन समाज के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।


