अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) के वैज्ञानिकों ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में मंडुवा की उन्नत किस्म ‘वीएल मंडुवा-376’ के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर किसानों से फसल के बारे में सीधे संवाद किया। वैज्ञानिकों ने पाया कि यह कम अवधि में तैयार होने वाली किस्म स्थानीय प्रजातियों की तुलना में बेहतर उपज देने के साथ किसानों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो रही है। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत के मार्गदर्शन में वैज्ञानिकों के दल ने कृषि विज्ञान केंद्र, तवांग के अधिकारियों के साथ 20 अगस्त को तवांग जिले के गोंगखार और ग्यामटोंग गांवों का भ्रमण किया। यह कार्यक्रम उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्रों के लिए संस्थान की विशेष परियोजना के तहत आयोजित किया गया। भ्रमण के दौरान किसान-वैज्ञानिक संवाद और किसान दिवस का आयोजन किया गया, जिसमें किसानों से वीएल मंडुवा-376 की खेती के अनुभव, इसकी उपयोगिता और स्थानीय किस्मों की तुलना में इसकी विशेषताओं पर चर्चा की गई। किसानों ने बताया कि नई किस्म से उन्हें स्थानीय प्रजातियों की अपेक्षा बेहतर उत्पादन मिला है। वैज्ञानिकों के अनुसार वीएल मंडुवा-376 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह स्थानीय किस्मों की तुलना में 25 से 35 दिन पहले तैयार हो जाती है। इससे किसानों को दूरस्थ खेतों में लंबे समय तक जंगली जानवरों से फसल की रखवाली नहीं करनी पड़ती, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है। वैज्ञानिक दल में शामिल डॉ. कामिनी बिष्ट, डॉ. सी.के. सिंह, डॉ. आर.पी. मीना और डॉ. एम.एस. भिंडा ने कहा कि किसानों को बेहतर उत्पादन का पूरा लाभ दिलाने के लिए मंडुवा आधारित लघु उद्यमों को बढ़ावा देने और विपणन व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कच्चे और प्रसंस्कृत मंडुवा उत्पादों के लिए संगठित बाजार विकसित करने पर भी जोर दिया, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके। वैज्ञानिकों का मानना है कि तवांग में वीएल मंडुवा-376 का सफल प्रदर्शन पर्वतीय क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि, बेहतर उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।


