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अल्मोड़ा। पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी को अधिक लाभकारी बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, काफलीगैर (बागेश्वर) द्वारा अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 13 से 19 अगस्त तक चले इस प्रशिक्षण में विभिन्न गांवों के 38 किसानों को गुणवत्तायुक्त पौध उत्पादन की आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत के निर्देशन तथा कृषि विज्ञान केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ. निर्मल हेडाऊ के मार्गदर्शन में आयोजित प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को फल, सब्जी और पुष्प फसलों की पौध तैयार करने की उन्नत विधियों से परिचित कराया गया। प्रशिक्षण समन्वयक एवं केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राज कुमार ने फलदार पौधों की कलम तैयार करने, उन्नत कृषि तकनीकों और उत्पादन बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी। वहीं डॉ. नवल किशोर सिंह ने डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन, प्राकृतिक खेती और चारा उत्पादन पर मार्गदर्शन दिया। पादप सुरक्षा विशेषज्ञ हरीश चंद्र जोशी ने कीट एवं रोग प्रबंधन, मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन की जानकारी साझा की। डॉ. अमित कुमार ने कृषक उत्पादक समूह, कृषि व्यवसाय और विपणन के विषय में जानकारी दी, जबकि संस्कृति सिंह ने पोषण वाटिका और मूल्य संवर्धन पर व्याख्यान दिया। वरिष्ठ शोध अध्येता डॉ. राजेश कुमार मीणा ने सब्जियों की पौधशाला प्रबंधन का प्रदर्शन कराया। समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र और सब्जियों के बीज वितरित किए गए। प्रशिक्षण से पूर्व और बाद में हुए मूल्यांकन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम के सफल संचालन में प्रक्षेत्र प्रबंधक नीरज जोशी, कार्यालय सहायक मनोज कुमार सहित महेश सिंह, सौरभ सिंह, बहादुर सिंह, राजेंद्र सिंह और सुरेश लाल का योगदान रहा।


