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अल्मोड़ा। विकासखंड ताकुला सभागार में मंगलवार को वनाग्नि चौपाल का आयोजन किया गया। इसमें विकासखंड स्तरीय तथा ग्राम पंचायत स्तरीय वनाग्नि समितियों के सदस्यों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में जंगलों में लगने वाली आग से जल स्रोतों, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को हो रहे नुकसान तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर चर्चा की गई। जिलाधिकारी एवं जिला स्तरीय वनाग्नि समिति के अध्यक्ष के निर्देशों के क्रम में आयोजित कार्यक्रम में सहायक नोडल वनाग्नि और शीतलाखेत मॉडल के संयोजक गजेंद्र कुमार पाठक ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से वनाग्नि के कारणों और उसके प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जंगलों में आग लगने का मुख्य कारण चीड़, पिरूल या घास नहीं, बल्कि मानवीय हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा में सिविल, पंचायती और आरक्षित वनों का क्षेत्रफल करीब एक लाख तीस हजार हेक्टेयर है, जिसकी सुरक्षा के लिए सीमित संख्या में वन बीट अधिकारी और फायर वॉचर तैनात हैं। ऐसे में जंगलों को आग से बचाने के लिए जनसहभागिता बेहद जरूरी है। खंड विकास अधिकारी केशर सिंह बिष्ट ने जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापवृद्धि के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए जंगलों को आग से सुरक्षित रखने पर जोर दिया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों से मई और जून के दौरान खेतों और आबादी क्षेत्रों की आग को वन क्षेत्र तक पहुंचने से रोकने में सहयोग करने की अपील की। कार्यक्रम में नरेंद्र सिंह बोरा, राजा यादव, विजय कैड़ा, महेंद्र सिंह बोरा, संदीप कुमार, वैश मोहम्मद, मोहित कुमार आर्या, हुकुम सिंह कुर्वाबी, भावना आर्या, कपिल पांडे, गिरिश चंद्र भट्ट, भुवन चंद्र आर्या, मनोज कुमार वर्मा, संतोष लोहनी, अर्जुन कुमार, अजय कुमार, भूपाल सिंह, सूरज बिष्ट, जलज पंत, जगदीश दानू, अमित खड़ाई और कुवर पाल सहित पंचायतीराज, ग्राम्य विकास, अग्निशमन और वन विभाग से जुड़े कर्मचारी तथा जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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