रुद्रपुर। भारत छोड़ो आंदोलन की 83वीं वर्षगांठ पर सोमवार को श्रमिक संयुक्त मोर्चा ने आंबेडकर पार्क में प्रदर्शन कर केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। आयोजित सभा में वक्ताओं ने कॉरपोरेट व्यवस्था से मुक्ति और श्रमिक-किसान हितों की रक्षा की मांग की।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र की सरकार सार्वजनिक संस्थानों, रेलवे, बैंक, बीमा, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली समेत विभिन्न क्षेत्रों का निजीकरण कर रही है। उन्होंने चार श्रम संहिताओं को मजदूर विरोधी बताते हुए कहा कि इससे श्रमिकों के अधिकार प्रभावित होंगे। राज्य की धामी सरकार की ओर से श्रम संहिताओं को लागू किए जाने का भी विरोध किया गया।
वक्ताओं ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौतों का विरोध करते हुए किसानों के हित में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने की मांग की। साथ ही रांची में आइसा नेता कॉमरेड नेहा पर हुए हमले की निंदा करते हुए उनके प्रति एकजुटता जताई। प्रदर्शन के दौरान चारों श्रम संहिताएं वापस लेने, अमेरिका के साथ एफटीए समझौते रद्द करने, न्यूनतम वेतन 42 हजार रुपये करने, सभी श्रमिकों को पीएफ-ईएसआई के दायरे में लाने, सी 2 50 प्रतिशत के आधार पर एमएसपी की कानूनी गारंटी देने और दमनकारी कानून वापस लेने की मांग की गई।


